Web 3.0 क्या है? क्या फेसबुक और ट्विटर जैसी कम्पनी को इससे नुकसान होगा?

Web 3.0 क्या है 

नमस्कार दोस्तों आज हम जानेगे कि Web 3.0 क्या है. आज कल ये शब्द वेब 3.0 बहुत ही ज्यादा चर्चा का विषय बना हुआ है. जहा देखो वही इसकी चर्चा हो रही है. अब जब वेब 3 है तो इससे पहले के वेब 1 और वेब 2 भी होंगे. तो हम इन दोनों के बारे में संक्षेप में जानेंगे. वेब 1 वेब 2 और वेब 3 तीनो ही इन्टरनेट की पीढ़ी या जनरेशन है. और जैसे कि हर अगली पीढ़ी पुरानी पीढ़ी से ज्यादा एडवांस्ड या आधुनिक होती है. ऐसा ही यहाँ पर भी है.

Web 3.0 क्या है-What is Web 3.0 in Hindi?

Web3 को Web 3.0 के नाम से भी जाना जाता है. Web3 Foundation के अनुसार- वेब 3.0 एक विकेन्द्रीकृत (Decentralised) और निष्पक्ष इंटरनेट है जहां उपयोगकर्ता अपने डेटा, पहचान और भाग्य को स्वयं नियंत्रित करते हैं. यूजर के डाटा पर किसी और का नियंत्रण नहीं होता है. Web 3.0 में आप ही कंटेंट के मालिक होंगे. Web 3.0 यूजर को इन्टरनेट यूज करने की आजादी देता है. World Wide Web के inventor Tim Berners-Lee ने  Web 3.0 को semantic web. कहा है.

वेब 3.0 को नए ज़माने का इन्टरनेट भी कहा जा रहा है. शुरू से ही वेब 3.0 को इन्टरनेट का तीसरा चरण माना जा रहा है. Web 3.0 शब्द का प्रयोग सबसे पहले 2014 में एथेरियम के सह-संस्थापक गेविन वुड ने किया था.  चूंकि यह “विकेंद्रीकृत (Decentralised)” शब्द का उपयोग करता है इसका मतलब ये हुआ कि वेब 3.0 भी Bitcoin, NFTs के तरह ब्लाकचेन टेक्नोलॉजी पर आधारित है. वेब 3.0 Ethereum blockchain पर आधारित है. अब आपको समझ आ गया होगा कि Web 3.0 क्या होता है.

वर्तमान वेब की समस्याओं को दूर करने के लिए semantic web विकसित किया जा रहा है. सिमेंटिक वेब डेटा के एक वेब  में परिभाषित किया जा सकता है, जैसे एक global database और इसमे प्राथमिकता पहले मशीन को मिलती है और बाद में मानव को.

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Web 3.0 examples-DBpedia, Portable personal web, iGoogle, Brave browser

Web3 कैसे काम करता है-How does Web3 work in Hindi?

Web 3.0 क्या है जानने के बाद अब जानते है कि अब वेब 3 कैसे काम करता है.  वेब 3 का लक्ष्य आज के इंटरनेट का एक विकेन्द्रीकृत संस्करण बनाना है. इसक अर्थ है है इन्टरनेट का कण्ट्रोल यूजर को देना. चूंकि यहाँ पर हमने  “Decentralised” शब्द का उपयोग किया है, इसलिए केवल एक ही तकनीक है जो दिमाग में आनी चाहिए – Blockchain. Web 3 भी अक्सर सुने जाने वाले शब्द – Bitcoin, NFTs आदि की तरह ब्लॉकचेन तकनीक पर आधारित है. अभी तक , इसका अधिकांश भाग Ethereum blockchain पर आधारित है.

वास्तव में, Ethereum के सह-संस्थापक गेविन वुड ने पहली बार 2014 में Web3 शब्द का यूज किया था. अब वो Web3 फाउंडेशन चलाते है. ब्लॉकचेन पर इंटरनेट बनाने का मतलब है कि वेब3 ऐप का कोई एक कंट्रोलर नहीं है, जिसे अक्सर Decentralised Applications or dApps के रूप में पहचाना जाता है.

आज कोई भी वेबसाइट या ऐप जिस तरह से काम करते हैं, वह उनके सर्वर के माध्यम से होता है. सूचना Server को जाती है, और यह सर्वर से बाहर प्रवाहित होती है.आपके एक्शन को प्रतिक्रिया मिलती है और बीच में जो हो रहा है वह केवल platform provider ही जानता है. security protocols, privacy protection उपाय और डेटा पर अन्य कार्रवाइयां अक्सर उपयोगकर्ता के लिए अज्ञात होती हैं. यह एक कारण है जिसकी वजह से Web3 के अस्तित्व में आया. Web3 इस प्रक्रिया को ब्लॉकचेन के माध्यम से बदलता है. सरल शब्दों में, यह सूचनाओं को रिकॉर्ड करने का एक तरीका है, जो एक कंप्यूटर के बजाय कंप्यूटरों के नेटवर्क का उपयोग करता है. इससे सिस्टम को हैक करना या धोखा देना असंभव नहीं तो बहुत मुश्किल हो जाता है.



Web3 काम करने के लिए एक केंद्रीकृत सर्वर पर निर्भर नहीं करता है। इसका मतलब है Web3 पर, आप WhatsApp के सर्वर से अपने संदेशों को प्रवाहित किए बिना अपने साथियों को एक संदेश भेज सकेंगे. इसी तरह, आप बिना पेटीएम सर्वर के पैसे भेज या प्राप्त कर सकेंगे.

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वेब 3.0 टेक्नोलॉजीज का विकास-Evolution of Web 3.0

वेब 1.0 क्या है-What is Web 1.0 in Hindi

वर्ष 1989 के आस पास इसकी शुरुआत हुई थी. Web 1.0 को स्टेटिक वेब भी कहा जाता है.  वर्ल्ड वाइड वेब को बनाने वाले Tim Berners-Lee ने वेब १ को Read-only web की संज्ञा दी है. Web 1.0 में वेबसाइट स्टेटिक (स्थिर) होती थी. बिना किसी user interaction के बहुत कम जानकारी देती थी. कोई भी वेबसाइट को देख सकता था और और उसकी सामग्री को देख या पढ़ सकता था. लेकिन इसके आलावा वेबसाइट से कोई बातचीत नहीं कर सकता था जैसे कमेंट या सब्सक्राइब करना,अकाउंट बनाना. Web 1.0 में इतना ज्यादा पावरफुल नहीं था कि वो यूजर के लिए सही वेब पेज या रिजल्ट्स का चुनाव कर सके. जिससे यूजर को उसके अनुसार सही जानकारी नहीं मिल पाती थी.

वेब 1.0 की वेबसाइटों में Static HTML page शामिल थे जो बार-बार अपडेट होते थे. वेबसाइटों का मुख्य लक्ष्य किसी भी समय किसी के लिए भी जानकारी पब्लिश करना और ऑनलाइन उपस्थिति स्थापित करना था. Business companies वेबसाइट में केवल प्रोडक्ट की जानकारी या Catalogs देते थे.  प्रोडक्ट को खरीदने के लिए Add to cart जैसे विकल्प नहीं होते थे. 

Web 1.0 examplesInformation portals, Web forms, Netscape

वेब 2.0 क्या है-What is Web 2.0 in Hindi

वर्ष 1999 से वेब 2 की शुरुआत हुई. वेब 2 को Read-write web भी कहा जाता है.  वेब 2 इन्टरनेट यूजर की जरुरत को ध्यान में रखकर इंटरैक्टिव वेबसाइट और ऐप बनने लगे थे जैसे सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट, ब्लॉग, विकी, होस्टिंग सर्विस आदि. और इन सबका श्रेय वेब HTML5, CSS3,जावास्क्रिप्ट जैसी तकनीकों में प्रगति को जाता है. वेब 2 को सोशल वेब भी कहा जाता है. Web 2.0  में डाटा एक ही डेटाबेस में या सर्वर पर स्टोर रहता है. Web 2.0  में कहा जाता है कि यूजर ही प्रोडक्ट है.

इस समय भी यही वेब 2 चल रहा है. आप कोई वेबसाइट पर जाते है वहा पर कुछ पढ़ते है कुछ अच्छा लगता है तो कमेंट भी करते है. आप चाहे तो फेसबुक यूट्यूब जैसी वेबसाइट पर कुछ अपलोड भी कर सकते है. कहने का मतलब ये है कि आप वेबसाइट से इन्तेरेक्ट करके अपनी प्रतिक्रिया देते है. आप Quora जैसी वेबसाइट को ही देख लीजिये उस पर लोग प्रश्न पूछते है और उन प्रश्नों का जवाब कोई भी दे सकता है. वेब 2 ने लोगो को ऐसा प्लेटफार्म दिया जहा पर लोग अपने राय और अनुभवों को शेयर कर सकते है.

Web 2.0 examples-  Facebook, Twitter, Blogs, Quora, Wikipedia, YouTube, Reading and Writing, Online Communities, Google, Web Services, APIs, RSS, Broadband, Wikipedia



वेब 3.0 के एप्लीकेशन-Web 3.0 Applications

Siri-Apple का वॉयस-नियंत्रित AI assistant

इन वर्षों में Apple का वॉयस-नियंत्रित AI सहायक Siri अधिक बुद्धिमान हो गया है और पहली बार iPhone 4S में आने के बाद सीरी की क्षमताओं में विकास हुआ है. सिरी जटिल और व्यक्तिगत कमांड को समझने के लिए Speech recognition (आवाज पहचान) और Artificial intelligence (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) का उपयोग करता है. जिससे वो आपके कमांड को तेजी से समझ कर उसका पालन करता है. कृत्रिम बुद्धिमत्ता के  आज, सिरी और अन्य एआई सहायक जैसे अमेज़ॅन के एलेक्सा और सैमसंग के Bixby आसानी से आपकी अनुरोधों को समझ जाते है. कोई अपॉइंटमेंट बुक करना हो या फिर कही कॉल करना हो.

Wolfram Alpha

Wolfram Alpha वेब 3 का एक बेहतरीन उदाहरण है. वॉलफ्रेम अल्फा कम्प्यूटेशनल नॉलेज इंजन है जो आपके किसी भी प्रश्नों का उत्तर गणना द्वारा देता है. जबकि सर्च इंजन जैसे गूगल में आपको बहुत से वेब पेजेज दिखाई देते है. फिर आप उस वेब पेज में जाकर अपनी जानकारी को एकत्र करते है जबकि वॉलफ्रेम अल्फा में ऐसा नहीं है. वॉलफ्रेम अल्फा  आपको कम और सटीक जानकारी एक ही वेब पेज पर देता है. आप किसी भी व्यावहारिक तुलना के लिए गूगल और वॉलफ्रेम अल्फा का यूज करे आपको दोनों में अंतर समझ आ जायेगा.

Storj: Decentralized Cloud Storage (DCS)

Storj एक Decentralized Cloud Storage (विकेंद्रीकृत क्लाउड स्टोरेज) है जहा पर डाटा किसी केंद्रीकृत डेटा सेंटर पर स्टोर नहीं होता है, बल्कि हर फाइल को एन्क्रिप्ट करके 80  टुकड़ों में विभाजित कर दिया जाता है और फिर वैश्विक क्लाउड नेटवर्क पर भेज दिया जाता है. ये दुनिया का पहले DCS है. कोई भी व्यक्ति इसमे केवल 1-क्लिक से रजिस्टर कर सकता है. इसे यूज करना बिल्कुल आसान है और इसमे फ्री अकाउंट में 150 GB स्टोरेज मिलता है. इतना ज्यादा स्टोरेज जैसे गूगल ड्राइव, वन ड्राइव, ड्राप बॉक्स भी नहीं देते है.  

Brave Browser

Brave फ्री और ओपन सोर्स ब्राउज़र है जो कि यूजर की प्राइवेसी पर ज्यादा ध्यान देता है. ब्राउज़र एड-ब्लॉकर के साथ पहले से इंस्टॉल आता है. ताकि आपकी सेफ रहे. यह उपयोगकर्ताओं को क्रिप्टोकरेंसी के बदले में अपना डेटा बेचने की भी अनुमति देता है. आप चाहे तो विज्ञापन देखकर BAT क्रिप्टो टोकन भी कमा सकते है.

वेब 3 की विशेषताए-Features of Web 3.0 in Hindi

वेब 3 की कोई मानक परिभाषा नहीं है लेकिन इसके कुछ फीचर है जो इसे परिभाषित करने में मदद करते है.

1. Decentralization:विकेन्द्रीकरण

सबसे मुख्य विशेषता Decentralization (विकेन्द्रीकरण) है. अभी जब भी आप वेब पर कुछ पढ़ते हो या देखते हो वो किसी एक जगह पर स्थित सर्वर पर स्टोर रहता है. और उस कंटेंट पर नियंत्रण उस सर्वर सेवा देने वाली होस्टिंग कम्पनी का होता है. वो जब चाहे तब कोई भी कंटेंट डिलीट कर सकते है. जैसे यूट्यूब का नियंत्रण गूगल के पास है. गूगल यूट्यूब पर किसी भी विडियो को डिलीट या बैन कर सकता है. इसी तरह फेसबुक और ट्विटर पर भी आपके पोस्ट पर इन बड़ी सोशल मीडिया कंपनी की नजर रहती है. और इस तरह इस समय इन्टरनेट पर इन्ही कंपनियों का एकाधिकार है. 

लेकिन वेब 3 में ऐसा नही होगा. इसमे कंटेंट या जानकारी को बहुत से जगह पर स्टोर किया जा सकेगा. जिससे इसे विकेंद्रीकृत किया जा सकता है. इस तरह वेब 3 पर किसी एक एकाधिकार नहीं हो सकेगा. 

2. Ubiquity:सर्वव्यापकता

कंटेंट को बहुत से डिवाइस या ऐप से  प्राप्त किया जा सकता है क्योंकि वेब 3 से रोजमर्रा के प्रत्येक उपकरण जुड़ा होता है. इंटरनेट ऑफ थिंग्स इसका एक अच्छा उदाहरण है.

3. Trustless and Permissionless

विकेंद्रीकरण के अलावा और open-source software पर आधारित होने के कारण, वेब 3.0 “विश्वसनीय” भी होगा (यानी, नेटवर्क प्रतिभागियों को एक विश्वसनीय मध्यस्थ के बिना सीधे बातचीत करने की अनुमति देगा) और “अनुमतिहीन” (जिसका अर्थ है कि कोई भी किसी के बिना परमिशन के भाग ले सकता है). नतीजतन, वेब 3.0 एप्लिकेशन या तो ब्लॉकचैन या विकेन्द्रीकृत पीयर-टू-पीयर नेटवर्क या उसके संयोजन पर चलेंगे.



4. Artificial Intelligence (AI) and Machine Learning:

Artificial Intelligence और Natural language processing (प्राकृतिक भाषा प्रसंस्करण) की मदद से कंप्यूटर इंसानों की तरह जानकारी को समझ पाएंगे और किसी भी प्रश्न का बहुत ही सटीक रिजल्ट देंगे.  वेब 3.0 मशीन लर्निंग का भी उपयोग करेगा, जो एआई की एक शाखा है जो कि इंसानों के सीखने के तरीके का नक़ल करके डेटा और एल्गोरिदम का उपयोग एक्यूरेसी में सुधार करने के लिए करती है. ये क्षमताएं कंप्यूटर को और भी तेजी से किसी चीज को समझने में मदद करती है.

5. Semantic Web

वेब 3.0 में सिमेंटिक वेब की भी गुण होंगे. वेब 2.0 के लिए यूज की जाने वाली तकनीको में सुधार ही सिमेंटिक वेब है जिसे वेब 3.0 भी कहा जाता है.  ये डेटा को कई सिस्टम और प्लेटफार्म में साझा करने में सक्षम बनाता है. यह विभिन्न डाटा फॉर्मेट और प्लेटफार्मों के बीच एक माध्यम का काम करेगा.

Web 3.0 के फायदे और नुकसान 

1. Web 3.0 के फायदे 

  • जो कोई भी इन्टरनेट नेटवर्क पर है उसके पास सेवा का उपयोग करने की अनुमति है या दूसरे शब्दों में, अनुमति की आवश्यकता नहीं है.
  • आपने देखा होगा कि फेसबुक पर लोग दूसरे को ब्लाक कर देते है.  वेब 3 में आपको कोई भी ब्लॉक नहीं कर सकता है या आपको सेवा तक पहुंच से वंचित नहीं कर सकता है.
  • Ownership of Information-आप ही अपने डाटा के मालिक होंगे. गूगल, फेसबुक जैसे कंपनी आपका डाटा नहीं ले पाएंगी. जिससे उन्हें थोडा नुकसान हो सकता है.
  • ज्ञान साझा करना आसान होगा.
  • Google, Youtube, Facebook जैसे कंपनी आपके कंटेंट को नहीं हटा पाएंगी.

2. Web 3.0 के नुकसान 

  • वेब 1.0 वेब साइटें काफी अधिक पुरानी प्रतीत होंगी
  • पुराने या कम एडवांस गैजेट वेब 3 को सपोर्ट नहीं कर पाएंगे.
  • लोग वेब सर्फिंग में अधिक समय व्यतीत करेंगे.
  • Technology अभी इसके लिए पूरी तरह से तैयार नहीं है.
  • Privacy policy की जरुरत होगी.

एलॉन मस्क क्या कहते है Web 3.0 के बारे में

कुछ लोग Web 3.0 के पक्ष में है तो कुछ नहीं है. जैसे ट्विटर के फाउंडर Jack Dorsey और SpaceX, टेस्ला कंपनी के सीईओ Elon Musk वेब 3.0 को सपोर्ट नहीं करते है. Elon Musk ने एक इंटरव्यू में कहा कि “वेब 3 एक अस्पष्ट अवधारणा है जिसमें ब्लॉकचेन और क्रिप्टोक्यूरेंसी के आसपास इंटरनेट सेवाओं का पुनर्निर्माण किया जाता है और ये वास्तविकता से ज्यादा मार्केटिंग है.”

Jack Dorsey ने ट्वीट करके कहा कि ” आप web3 के को कण्ट्रोल नहीं कर सकते है. ये एकअलग लेबल के साथ एक केंद्रीकृत इकाई (Centralized entity)है”. ऐसा उन्होंने इसलिए कहा कि एक बड़े निवेशक Marc Andreessen बहुत से Web3 projects and startups में निवेश कर रहे है. जिससे वेब 3 एक विकेंद्रीकृत से केंद्रीकृत इकाई बन जायेगा. इसी की आलोचना Jack Dorsey कर रहे थे.

Jack Dorsey ने यहाँ तक ये भी कह दिया था कि इन्टरनेट की नई पीढ़ी वेब 3 एक नई बोतल में पुरानी शराब के अलावा और कुछ नहीं है. क्योंकि जब वेब 3 के प्रोजेक्ट्स में बड़ी कंपनी निवेश करने लगेंगे तो वेब 3 पर पब्लिक का नहीं बल्कि किसी गिने चुने लोगो का अधिकार होने लगेगा. और ये एक तरह से फिर वेब 2 का रूप होगा.

निष्कर्ष: Web 3.0 क्या है 

Web 3.0 क्या है (Web 3.0 in Hindi) हिंदी में आपको समझ आ गया होगा. वेब 3.0 नया इंटरनेट एक अधिक व्यक्तिगत और customized browsing experience प्रदान करेगा, ये स्मार्ट होने के साथ ही human-like search assistant होगा, और ये अन्य विकेन्द्रीकृत लाभ भी देगा जो सबके लिए एक समान वेब स्थापित करने में मदद करेगा.

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